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जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने बढ़ाया कदम

Date : 17/01/2020

ग्राम सरखनापूरब के दो ग्रामीण किसानों ने भूजल के स्तर के घटते स्तर को देखते हुए वर्षा जल के संचयन हेतु कार्य किया है। संवाद मे इन किसानों ने बताया कि यह समुदाय की ग्राम जल प्रबन्धन समिति के सहयोग से सम्भव हो सका है


                  “तुम मुझे जल दो, मैं तुम्हें जीवन दूँगी।”                    - पृथ्वी पुकार

हमारी पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पानी से घिरा हुआ है। हमारे दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में दिन प्र्रतिदिन पानी की आवश्कता बढ़ती जा रही है। जीवन की आवश्कताओं की प्रतिपूर्ति के लिए सम्पूर्ण जनसंख्या का जीवन भूजल, सतहीजल, व वर्षाजल पर निर्भर था, लेकिन बढ़ती जनसंख्या, औद्यागिकीकरण व बदलते मौसम ने इस सम्पूर्ण व्यवस्था को बदलकर रख दिया । जिससे सतही जल दूषित हुआ और उसकी आवश्यकता कम होती चली गई। इस औद्योगिकीकरण के कारण पेड़ों की कटाई अन्धाधुन्ध हुई जिससे मानसून ने भी अपना रूख बदल दिया और अब जनसंख्या का अधिकांश भाग भूजल पर निर्भर है । अब प्रत्येक कार्य में केवल भूजल का प्रयोग किया जाता है । जिससे दिन प्रतिदिन भूजल में गिरावट आ रही है, यदि ऐसे ही भूजल का दोहन होता रहा तो वो दिन दूर नही जब हमें जल संकट का सामना करना पड़ेगा। भूजल के गिरते स्तर को देखते हुए दो ग्रामीणों ने भूजल रिर्चाज हेतु बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है। आइये आपको इन ग्रामीणों का परिचय करवाते हैं।

शारदा नदी के बेसिन में बसे ग्राम सरखनापूरब विकास खण्ड पलिया जिला लखीमपुर खीरी में 737 परिवारों के 3675 जनसंख्या निवास करती है । गांव की सम्पूर्ण जनसंख्या भाग में केवल दो लोगो जल प्रबन्धन में कर दिखाया , जिसके बारे में शायद  इस ग्राम के किसी व्यक्ति ने कल्पना तक न की होगी। ग्राम के ही दो व्यक्ति श्याम किशोर पुत्र सूर्जी व रामनिवास पुत्र शारदा , यह दोनों व्यक्ति पेशे से किसान हैं ् जो अपनी निजी भूमि पर खेती कर अपना जीवन यापन करतें हैं, उन्होंने बताया कि घर से खेती तक में जल की आवश्यकता की प्रतिपूर्ति हेतु भूजल का उपयोग किया जाता है, इन लोंगो ने बताया कि उनके अनुमान के अनुसार उन्होंने पाया गया है कि प्रत्येक वर्ष भूजल के स्तर में गिरावट आ रही है। जिसके लिए उन्होंने जल के महत्व को समझा और जल प्रबन्धन हेतु योजना बनाई। जिसमें श्यामकिशोर द्वारा अप्रैल व रामनिवास द्वारा जून के महिने में घर पर वाॅटर रिचार्ज बोरवेल लगवाया गया। जिसमें घर में होने वाले वर्षाजल के साथ -साथ घर में उपयोग पानी में आवश्यकता से अधिक उपयोग होने वाले पानी को संग्रहित किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जब उनके पास बोरवेल व्यवस्था नही थी तो बरसात के समय उनके घर के आगे नाली न होने से काॅफी जल भराव हो जाता था लेकिन इस बोरवेल को लगाने के बाद उन लोगों ने न केवल वर्षाजल को संरक्षित किया है, बल्कि जल भराव की स्थिति को समाप्त किया है। चर्चा के दौरान उपरोक्त दोनों व्यक्तियों ने बताया कि इस जल प्रबन्धन के की प्रेरणा जल प्रबन्धन समिति से मिली है। जल प्रबन्धन समिति के विषय में उन्होंने बताया कि उनके ग्राम में शारदा नदी पर आधारित ट्रोसा परियोजना संचालित है जिसमें समुदाय स्तर पर महिला और पुरूष की भागीदारी के साथ ग्राम जल प्रबन्धन समिति कार्यरत है। ग्राम जल प्रबन्धन समिति द्वारा मासिक बैठक कर जल प्रबन्धन, जल संरक्षण, जल अधिकार व जल संसाधन प्रबन्धन के प्रति चर्चा कर योजना बनाई जाती है तथा उसके फायदों के बारे में समुदाय को बताया जाता है। जिससे प्रभावित होकर हम लोगों ने इस सराहनीय कदम को उठाया है। श्यामकिशोर जी ने बताया कि वह खुद भी ग्राम जल प्रबन्धन समिति के सदस्य हैं।  

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The initiative is supported by Oxfam India under Transboundary Rivers of South Asia (TROSA 2017 -2021) program. TROSA is a regional water governance program supporting poverty reduction initiatives in the Ganges-Brahmaputra-Meghna (GBM) and Salween basins.The program is implemented in India, Nepal, Bangladesh and Myanamar and is supported by the Government of Sweden.
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